अध्याय 4: Dukh ki keemat
1944 के दौर में, जापान को लड़ाई में काफी नुकसान हुआ था. इस नुकसान के दो महीने बाद की बात है. ओनाडा, जो कि जापान की लड़ाई में एक लीडर था ek आईलेंड में ही रुक गया जहाँ पर अमेरिकन ने कब्ज़ा किया हुआ था. वो अमेरिकन्स से लड़ता रहा बावजूद इसके कि जापान ने तब तक सरेंडर कर दिया था. उसे ये बात मालूम नहीं थी और वो आइलैंड me khud के फार्मर्स को शूट करता रहा. जापानी सरकार ने उसे ढूँढने में पूरे 30 saal लगा दिए थे मगर कभी कामयाब नहीं हो पाए थे.उसको कभी कोई पकड नहीं पाया था. फिर एक दिन सुजुकी नाम के एक Hippie आदमी ने उसे पकड लाने का फैसला किया और सिर्फ 4 दिन बाद ही वो इसमें कामयाब भी रहा. jab baad me logo ne Onoda se poocha ki vo 30 saal tak kyu ek island me rha is par Onodo ne kaha ki use kabhi bhi na haar man ne ka order diya gaya tha isiliye usne kabhi bhi haar nhi maani.
सोचना भी अजीब लगता है कि कैसे koi insaan apni zindagi ka ek badda hissa kayi useless aur bevkoofi cheezo par lga dete hai. Jaise ki lieutenant Onoda ne apni zindagi ke 30 saal kede kha kar, gandgi me so kar ek aisi ladayi ladne me lga diye jo ho hi nhi rahi thi.
खुद को समझना बिल्कुल ऐसा ही है जैसे कोई प्याज़ होता है. इसकी बहुत सी परते होती है और जैसे-जैसे ये परते उतरती है, आपके आंसू बहते है. इसकी पहली परत है खुद की भावनाओं को जानना और समझना. दूसरी परत होगी ये समझना कि इन भावनाओं की वजह क्या है. एक बार जब हम इन्हें अच्छे से समझ लेते है तो इनपर काबू पाना आसान हो जाता है. और एक बार जब हमें अपनी भावनाओं की पहचान हो जाती है तो इन्हें मनमुताबिक चुना जा सकता है. हम अपने मकसद इन्ही भावनाओं के आधार पर चुन सकते है लेकिन अगर हम गलत मकसद चुन लेते है तो इन सभी फीलिंग्स और इमोशन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. वो इसलिए क्योंकि हम किसी चीज़ की तभी कद्र करते है जब उसके साथ हमार्री भावनाए जुडी होती है. , कुछ ऐसे आम वैल्यूज़ होते है जो हर किसी के एक परेशानी का सबब है मगर इनका कोई ठोस सोलुशन नहीं होता और ये वैल्यूज़ है:
• खुशी: देखा जाए तो ये सबसे बड़ी वैल्यू है मगर हम हर चीज़ सिर्फ ख़ुशी की खातिर तो नहीं करते और जिंदगी कभी भी परफेक्ट नहीं होती, हालांकि लोग कोशिश ज़रूर करते है, आपको दुःख मिलेंगे ही मिलेंगे और अगर आपने इन दुखो से खुद को दूर रखने की फ़िज़ूल कोशिश की तो यकीनन आप और ज्यादा दुखी होंगे. क्योंकि दुःख तो आते रहेंगे बस आपको उनसे कुछ सीखने का तरीका ढूंढना है.
• मटरियल सक्सेस: सफलता को कभी भी धन-दौलत से मत आंकिये ki आपके पास कितना पैसा है या आपकी बीवी कितनी खूबसूरत है वगैरह iske bajaye बजाये आप कितने ईमानदार है, कितने मेहनती है, औरो के लिए आपके दिल में कितना प्यार है जैसी बाते मायने रखती है नाकि आपका जोड़ा हुआ रुपया-पैसा या गाडी, बंगला. जो लोग अपने पैसे का रौब दिखाते है वे ना सिर्फ छिछोरे होते है बल्कि एक तरह से बेवकूफ भी लगते है.
• हमेशा सही होना: ये बात याद रखिये कि हम इंसान है कोई रोबोट नहीं जो हर काम बिलकुल परफेक्ट करेंगे. हमारा दिमाग परफेक्ट बना ही नहीं है, हम कोई ना कोई गलती ज़रूर करते है लेकिन ज़रूरी बात ये है कि अगर हमसे कोई गलती हो जाती है तो उससे सीख ले ना कि उसे फिर से दोहराए. कोई भी इंसान हमेशा सही नहीं होता. आप कितनी बार सही थे इसकी गिनती याद रखना फ़िज़ूल है इससे आपको कुछ भी नया सीखने को नहीं मिलेगा.
• पोजिटिव रहना: ये सच है कि पोजिटिव सोच रखने के अपने फायदे है मगर हर बार जिंदगी में सब पोजिटिव और अच्छा ही होगा ये सोच कर चलना आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. असल जिंदगी में हमें बहुत से उतार-चड़ाव देखने पड़ते है और आपको ये सच स्वीकार करना ही पड़ेगा. क्योंकि अगर आप इसे नहीं मानते तो फीडबैक लूप के चंगुल में फंस कर रह जायेगे. अगर आप अपने मन में उठने वाले नेगेटिव इमोशंस को रोकने की भरपूर कोशिश करेंगे तो और भी ज्यादा नेगेटिव भावनाओं से घिर जायेंगे. जब आपके मन में कुछ नेगेटिव आता है तो उसे रोकिये मत, बस सोचिये कि अगर ऐसा हो भी गया तो आप उसका सामना कैसे करेंगे.
Comments
Post a Comment