THE SUBTLE ART OF NOT GIVING A F**K ch1
heyy friends
CH 1
today's content not for any psychological and mythological or business related.
now i wanna tell you about one of the famous self-help author, personal development consultant, entrepreneur, and blogger and his one and only famous book "THE SUBTLE ART OF NOT GIVING FUCK"
don't judge this book from the title. this book is different from all other books.because everything in this book is written upside down. if you want the video summary of this book so click on this link given below::
video summary https://youtu.be/aw-sGcI_QcQ
A week ago, i started reading this book and now I've complit this book so I'm also able to tell you summery of this book ....so without wasting any time let's begins....
CH 1
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now i wanna tell you about one of the famous self-help author, personal development consultant, entrepreneur, and blogger and his one and only famous book "THE SUBTLE ART OF NOT GIVING FUCK"
don't judge this book from the title. this book is different from all other books.because everything in this book is written upside down. if you want the video summary of this book so click on this link given below::
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A week ago, i started reading this book and now I've complit this book so I'm also able to tell you summery of this book ....so without wasting any time let's begins....
HINDI
अध्याय 1: कोशिश मत कीजिये
चार्ल्स बुकोव्स्की एक शराबी था. एक बहुत बड़ा जुआरी और जिंदगी से हारा हुआ ऐसा इंसान जिसकी सलाह शायद ही कभी कोई लेना चाहेगा. इसलिए तो हम अपनी शुरुवात ऐसे इंसान की कहानी से कर रहे है. बुकोव्स्की शुरू से ही एक लेखक बनना चाहता था मगर उसके काम को sabhi न्यूज़पेपर और मेगजीन ne घटिया दर्जे का बताकर उसका मखौल उड़ाया. इस बात से दुखी होकर बुकोव्स्की गहरे डिप्रेशन में चला गया और उसने शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे वो एक बहुत बड़ा शराबी बन बैठा. अपनी जिंदगी के करीब 30 साल शराब आर जुए में बर्बाद करने के बाद बुकोव्स्की को एक दिन एक मौका मिला. एक छोटे पब्लिशिंग हाउस ने उसके काम में दिलचस्पी ली. बुकोव्स्की को बड़ी मुश्किल से एक मौका हाथ लगा था जिसे वो गंवाना नहीं चाहता था. उसने झट से वो कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिया. और तब उसने अपनी पहली किताब लिखी. फिर इसके बाद उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. एक के बाद एक उसने 6 किताबे और लिखी. इसके साथ ही उसने कई सारी कविताएं भी लिखी और उसकी किताबो की 2 मिलियन से ज्यादा कोपियाँ बिकी. ये उसके लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी थी.
अमेरिकन ड्रीम me kaha jaata hai ki hamesha koshish karte raho kabhi haar mat maano. Lekin बुकोव्स्की की कब्र के पत्थर पर Likha tha “कोशिश मत कीजिये”
बुकोव्स्की के काम की ख़ास बात ये नहीं थी कि हारने के बावजूद उसने कोशिश ज़ारी रखी बल्कि ये है कि उसने खुद को बुरे से बुरे हाल में स्वीकार किया. उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा जब कामयाबी उसके हाथ लगी ना ही वो पहले से अच्छा और Sudhra हुआ इंसान बन गया और ना ही उसके सक्सेसफुल बनने में उसकी अच्छाई का कोई हाथ था.
हम सब अपनी जिंदगी में कभी ऐसे दौर से गुज़रते है जहाँ हालात बद से बदतर होते है. जैसे कि मान लीजिये, आपको गुस्सा बहुत ज्यादा आता है. इतना गुस्सा कि आप खुद पे काबू नहीं रख पाते है. और आप इसे काबू नहीं रख पाते ये सोचकर आपका गुस्सा और बढता है. वाह! ज़रा सोचिये कितने मज़े की बात है कि आपको इस बात पर गुस्सा आता है कि आपको गुस्सा बहुत आता है. आप इस गुस्से से बचने का कोई रास्ता निकालन| चाहते है पर निकाल नहीं पा रहे. तब आप खुद से और अपने इस गुस्से की समस्या से नफरत करने लगते है. जब आप कभी अपने अकेलेपन को लेकर उदास होते हो तो आपके मन में उदासी से भरे ख्याल मंडराने लगते है. आप अपनी उदास जिंदगी और अकेलेपन के बारे में घंटो सोचते रहते है और सोच-सोच कर और भी ज्यादा उदास हो जाते है. तो मेरे दोस्त, इसीको कहते है जहन्नुम का फीडबैक लूप!
ज़रा याद कीजिये कि आपके दादाजी के वक्त में क्या होता था ? उस वक्त में जब कोई किसी को अपने से बेहतर देखता तो बेशक कुछ पल उदास होता मगर फिर अपने काम में लग जाता था ये सोचकर कि यही जिंदगी है. लेकिन अब अगर 5 सेकंड्स के लिए भी दुखी होते है तो आपको सबकी जिंदगी अपने से बेहतर लगने लगती है. आप खुद पे इतने शर्मिंदा हो जाते हो जैसे कि सब कुछ हार बैठे हो. और फिर अपनी इस शर्मिंदगी से आपको खुद पे और भी शर्म आने लगती है. शर्मिंदगी के इस गोल चक्कर में आप फंस से रह जाते हो. इसलिए तो ज़रुरत है कि इन बातो को लेकर ज़रा भी परेशान ना हुआ जाए. अगर आप उदास है तो कोई शर्म की बात नहीं, ऐसा सबके साथ होता है. शर्मिंदगी के इस चक्कर यानी लूप से बाहर निकालिए और जो चीज़े आपको परेशान कर रही है उनसे कहिये” भाड़ में जाओ” (don’t give a fuck about it).
आपके साथ सब अच्छा ही अच्छा हो यही सोचना सबसे बड़ी बुरी बात है. और अगर फिलोसफ़र एलन वाट्स की माने तो अपने साथ हुए नेगेटिव अनुभवों को स्वीकार करना ही असल में खुद एक बड़ा पोजिटिव अनुभव है. ये बात सुनने में अजीब लगती है मगर यही सच है.
जितना ज्यादा आप खुशियों के पीछे भागेंगे, उतने ही ज्यादा दुखी रहेंगे. दुसरे शब्दों में कहे तो ऐसी कोशिश भी ना करे. क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप किसी बात के लिए केयरलेस होते है तो वही चीज़ आपको आसानी से मिल जाती है बजाये कि जब आप उसके पीछे भागते है. जैसे जब आप जिम जाते है तब वर्क आउट करने में आपको काफी दर्द सहना पड़ता है लेकिन इस दर्द का इनाम आपको मिलता है स्ट्रोंग मसल के रूप में. थोड़े से पेन के बदले में आपको एक खूबसूरत बॉडी मिलती है, आपकी हेल्द इम्प्रूव होती है. इसी तरह जब आप अपने किसी काम में नाकमयाब होते है तो यही हार आपकी लिए किसी फ्यूल की तरह काम करती है और आप अपनी कोशिश में दुगने जोश के साथ फिर से जुट जाते है. दर्द को रोकने की कोशिश करना ही आपको बाद में और भी ज्यादा दर्द का एहसास कराता है. दर्द या हार जो भी आपको मिले उसे रोकिये मत, बस उसकी परवाह करना छोड़ दीजिये. फिर देखिये आपको कोई भी रोक नहीं पायेगा. परवाह ना करने का मतलब ये नहीं कि आप बिना कुछ किये शान्ति से बैठे रहे या एकदम किसी पत्थर की तरह बेअसर हो जाए. क्योंकि सिर्फ मुर्दों को कुछ महसूस नहीं होता, जिंदा आदमी तो सब कुछ फील कर सकता है. और हम आपसे ऐसा करने को नहीं कह रहे. हम तो बस यही कहना चाहते है कि परवाह ना करने का मतलब है कैसे भी हालात आये बस आराम से बैठिये फिर चाहे आपकी सोच औरो से अलग ही क्यों ना हो. आप अलग सोचिये,अलग बनिए यही बेहतर है बजाये कि आप चिकना घड़ा बने. चिकना घड़ा तो समझते होंगे ना आप ? जिस पर किसी बात का कोई असर नहीं होता. ऐसे लोग बुजदिल और मूर्ख होते है. आपको चिकना घड़ा नहीं बनना है, बस बेपरवाह बनना है जिससे आप फ़ालतू की टेंशन से बचे रहे.
लेकिन कभी-कभी आपको चीजों की परवाह भी करनी पड़ती है तो तब सवाल ये उठता है कि ऐसा क्या है जिसकी आपको सच में परवाह करनी चाहिए ?
हमारे लेखक की माँ के साथ ऐसी ही एक घटना घटी थी. दरअसल एक बार उनकी एक सहेली ने उन्हें काफी बड़ी रकम का चूना लगा दिया था. अब अगर लेखक बिलकुल ही बेपरवाह होता तो जो उसकी माँ के साथ हुआ उसकी ज़रा भी परवाह नहीं करता मगर लेखक ने अपनी माँ को भरोसा दिलाया कि वे वकील की मदद लेंगे और उस इंसान को सबक सिखा कर ही रहेंगे. हां उसने ये सब इसलिए किया kyunki use us insaan ki parva nhi thi. He Don’t give a F*ck about him.
"MARK MANSON IS A STARE BLOGGER WITH MORE THAN TWO MILLION REDERS. HE LIVES IN IN NEW YOURK CITY.THE SUBTLE ART OF NOT GIVING A F**K IS HIS FIRST BOOK."


Nice life story..😁😂😁
ReplyDeleteCharls bakoski😂😂😂😂
ReplyDeleteNice👌
ReplyDeleteVery nice summary
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
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